HeritageJuly 18, 2026

एकता वृक्ष: शिल्प कला, परंपरा और मानवता का एक कालजयी प्रतीक

एकता वृक्ष: शिल्प कला, परंपरा और मानवता का एक कालजयी प्रतीक

एक अद्भुत कृति की कथा

जब कला पत्थर की सीमाओं को लांघकर मानवीय संवेदनाओं को छूने लगे — तो वह केवल कृति नहीं, संदेश बन जाती है।

भारतीय शिल्प कला के इतिहास में ऐसी ही एक अद्भुत कृति है — ‘एकता वृक्ष’, जिसे ‘सब धर्म समान’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मूर्ति केवल मकराना संगमरमर का उत्कृष्ट उदाहरण नहीं है, बल्कि यह महान शिल्प गुरु पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा ‘पृथ्वीपुरा वाले’ जी की दूरदर्शी सोच और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत दस्तावेज है। यह अद्वितीय कृति PLPS Art Gallery के संग्रह की शोभा बढ़ाती है।

वसुधैव कुटुम्बकम्

“पूरा संसार एक परिवार है।”
एक प्राचीन सिद्धांत — जिसे एक शिल्पकार ने विभाजन के युग में पत्थर पर उकेर दिया।

महा उपनिषद

प्रथम खंड

50 वर्ष पहले का वह दौर और मानवता का संदेश

आज से लगभग 50 वर्ष पहले, जब सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण का दौर था, तब शिल्प गुरु पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा ‘पृथ्वीपुरा वाले’ जी ने अपनी छेनी और हथौड़ी को समाज में शांति का माध्यम बनाने का निर्णय लिया। वर्ष 1990 में तीन वर्षों के अथक प्रयासों के बाद उन्होंने इस ‘एकता वृक्ष’ को साकार किया।

इस कृति का मूल विचार अत्यंत गहरा था — पेड़ की छाया में छह प्रमुख धर्मों का समागम। यह मूर्ति भगवान राम, भगवान बुद्ध, गुरु नानक देव जी, ईसा मसीह, भगवान महावीर स्वामी, और इस्लाम धर्म के प्रतीकों को एक साथ एक ही वृक्ष के नीचे स्थापित करती है। यह इस सत्य को रेखांकित करती है कि धर्म आस्था का विषय हैं — लेकिन मानवता और प्रकृति से बड़ा कुछ नहीं है।

द्वितीय खंड

छह धर्म, एक वृक्ष

एकता वृक्ष में प्रत्येक स्वरूप को उसी श्रद्धा से तराशा गया है जिस श्रद्धा से कोई भक्त अपनी परंपरा को याद करता है — और सबको एक ही छाया, एक ही श्वास, एक ही दिव्य पत्थर में स्थापित किया गया है।

हिन्दू धर्म

भगवान राम
एवं देवी सीता

बौद्ध धर्म

भगवान गौतम
बुद्ध

सिख धर्म

गुरु नानक
देव जी

ईसाई धर्म

ईसा
मसीह

जैन धर्म

भगवान महावीर
स्वामी

इस्लाम

मक्का एवं
मदीना

तृतीय खंड

एक गौरवशाली परंपरा — आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति समाज

पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा ‘पृथ्वीपुरा वाले’ जी का व्यक्तित्व और उनकी कला केवल उनके स्वयं के कौशल का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह ‘आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति समाज’ की उस महान परंपरा का प्रतिबिंब थी, जो हजारों वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत है।

यह समाज मात्र एक समुदाय नहीं, बल्कि एक विशाल परिवार है। यहाँ हर घर में मूर्तिकला का जन्म होता है — कोई अपने गुरु से तो कोई अपने पिता से यह विधा सीखता है। इस समाज के कण-कण में हस्तशिल्प की सुगंध बसी है। आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति समाज ने भारतीय कला जगत को न जाने कितने कालजयी कलाकार दिए हैं, और पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा जी उसी गौरवशाली परंपरा के एक ऐसे रत्न हैं, जिन्होंने इस शिल्प को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। उनके लिए यह काम सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि एक पवित्र धर्म और संस्कृति को बचाए रखने का संघर्ष था।

चतुर्थ खंड

शिल्प कौशल का बेजोड़ नमूना

इस 21 इंच की मूर्ति को देखते ही जो बात सबसे पहले हैरान करती है, वह है इसकी निर्माण तकनीक। चार विशेषताएँ जो इसकी महानता प्रकट करती हैं:

०१

अकल्पनीय सूक्ष्मता

8-8 इंच की मूर्तियाँ, जिन्हें आज आधुनिक उपकरणों से बनाया जाता है, उन्हें पंडित जी ने केवल हस्तकला और छेनी-हथौड़ी के दम पर पूर्णता दी थी।

०२

खोखली संरचना

इसकी सबसे बड़ी विशेषता — इसे अंदर से पूर्णतः खाली करके बनाया गया है। इसमें बनी डालियाँ आर-पार दिखाई देती हैं, जो उस समय के शिल्पकारों की असाधारण कारीगरी को दर्शाती हैं।

०३

360-डिग्री दर्शन

दर्शकों तक धर्मों की एकता का संदेश पहुँचाने के लिए, पंडित जी ने एक विशेष मशीन का निर्माण कराया था — जो मूर्ति को 360° घुमाती है, हर कोण से एकता का दर्शन।

०४

छह-पेटा नक्काशी

मकराना मार्बल जैसे कठोर पत्थर पर दो पेटों की नक्काशी सामान्य मानी जाती है, लेकिन ‘एकता वृक्ष’ को छह पेटों के साथ तराशा गया।

पंचम खंड

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा जी की कलात्मक उत्कृष्टता को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया है। इसी अद्वितीय ‘एकता वृक्ष’ और उनके समग्र शिल्प कौशल के लिए उन्हें ये गौरव प्राप्त हुए:

2008
शिल्प गुरु सम्मान

भारतीय हस्तशिल्प का सर्वोच्च सम्मान — 2006 में नामित, 2008 में उनकी अद्भुत कलात्मकता के लिए प्रदान किया गया।

राष्ट्रीय
राष्ट्रीय पुरस्कार, भारत सरकार

भारतीय हस्तशिल्प और नक्काशी की परंपरा को जीवंत रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

गोल्ड मेडल
गोल्ड मेडल, भारत सरकार

उनकी असाधारण प्रतिभा और समर्पण के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया।

षष्ठ खंड

एक विरासत — जो प्रेरणा बनी रहेगी

‘एकता वृक्ष’ केवल मकराना मार्बल की एक मूर्ति नहीं है — यह एक कलाकार के उस प्रेम और अटूट विश्वास का प्रमाण है जो वह अपनी मातृभूमि और मानवता के प्रति रखता था। आज भी, जब हम इस मूर्ति को देखते हैं, तो हमें उस महान आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति समाज की दृष्टि का एहसास होता है, जिसने पत्थर में भी प्रेम और भाईचारे की धड़कन पैदा कर दी थी।

यह कृति आज भी हमें याद दिलाती है कि कला की कोई सीमा नहीं होती, और जब वह सच्ची निष्ठा और परंपरा के साथ रची जाए, तो वह पीढ़ियों तक मानवता का मार्गदर्शन करती है।

कस्टम कमीशन

अपना ‘एकता वृक्ष’ बनवाइए

वही एकता का संदेश अब अपने मंदिर, संस्थान, या पारिवारिक घर के लिए। हमारी चौथी पीढ़ी के कारीगर उसी जयपुर की कार्यशाला में हस्तनिर्मित एकता वृक्ष बनाते हैं — जहाँ पंडित जी ने मूल कृति रची थी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकता वृक्ष के बारे में

एकता वृक्ष क्या है?

एकता वृक्ष (सब धर्म समान) एक 21 इंच की मकराना मार्बल की मूर्ति है, जिसमें विश्व के छह प्रमुख धर्म — हिन्दू (भगवान राम), बौद्ध (भगवान बुद्ध), सिख (गुरु नानक देव जी), ईसाई (ईसा मसीह), जैन (भगवान महावीर स्वामी), और इस्लाम (मक्का-मदीना) — एक ही कल्पवृक्ष की छाया में एक साथ स्थापित हैं। इसे शिल्प गुरु पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा जी ने 1990 में साकार किया।

इसे बनाने में कितना समय लगा?

तीन वर्षों का निरंतर परिश्रम। पंडित लल्लू प्रसाद शर्मा जी ने लगभग 1987 में शुरू करके 1990 में इसे पूर्ण किया। एक ही मार्बल के वृक्ष में छह मूर्तियाँ, खोखली संरचना, और छह-पेटा नक्काशी — इस स्तर की कारीगरी के लिए यह समय अनिवार्य था।

यह मूर्ति अंदर से खोखली क्यों बनाई गई है?

खोखली संरचना इस मूर्ति की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। मार्बल के वृक्ष की हर डाली आर-पार दिखाई देती है, और अंदर की जगह इस बात का प्रमाण है कि मकराना मार्बल पर छेनी का ऐसा नियंत्रण केवल आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति समाज के मास्टर शिल्पी ही कर सकते थे।

क्या मैं एक कस्टम एकता वृक्ष बनवा सकता हूँ?

हाँ। पंडित जी के परिवार की चौथी पीढ़ी PLPS Art Gallery में मंदिरों, संस्थानों, पारिवारिक घरों, और सार्वजनिक स्थापनाओं के लिए कस्टम एकता वृक्ष बनाती है। आकार और मार्बल विनिर्देश कस्टमाइज़ किए जा सकते हैं — सामान्य वितरण समय आकार और जटिलता के अनुसार 90–180 दिन।

एकता वृक्ष ने कौन-कौन से पुरस्कार दिलवाए?

एकता वृक्ष, पंडित जी के आजीवन कार्य के साथ मिलकर, उन्हें शिल्प गुरु सम्मान (2008), भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार, और भारत सरकार का गोल्ड मेडल दिलाने में योगदान दिया — भारतीय हस्तशिल्प के तीन सर्वोच्च सम्मान।

मूल एकता वृक्ष कहाँ देख सकते हैं?

मूल एकता वृक्ष आज भी PLPS Art Gallery के संग्रह में हमारे जयपुर शोरूम — बी-149, खज़ाने वालों का रास्ता — में स्थित है। आगंतुक स्वयं आकर इस उत्कृष्ट कृति को देख सकते हैं और उस दृष्टि को समझ सकते हैं जिसने इसे आकार दिया।

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शोरूम

PLPS Art Gallery
बी-149, खज़ाने वालों का रास्ता
चाँदपोल बाज़ार, जयपुर 302001

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